देख तू लाड़िए

शेखर मास्टा व ढलेटा सुरेन्द्र कुमार
— १९९९
शादिए आशै आमै हेरे भाइयौ,‍‍ देखो लाड़े री ज़ानी रे। देख तू लाड़िए
लाड़ी ताखू भी छोड़िओ, देख लाड़े खी ढौबो हाए तेरे नानी री॥ देख तू लाड़िए

घोड़ी गाशी आशो लॅंगड़ो लाड़ो, देख कौर दो शादीए, मेरीए दादिए।
जिशी बियाली खौरै दपारै खोलो दारू रै आदिए॥

एकी आखी रो देखणो लाड़ो, एकी आखी रो काणो। देख तू लाड़िए
छेड़ो सौबी हाए छोटी, छेओड़ी, फिरो आपूखी सियाणो॥

देखो तुमै एस लाड़े री टौर, लाओ ज़ीनौ री पैन्टो।
ललचाऊणे गॉंवो री छोटी, लाओ मुँऔ दे सैन्टो॥

देखो भाइओ लाड़ी रे शाशू, देओ कौमरौ दे मेकै।
हॉंडीदो नॉंईं सौमे दो इॅंयौरै, हाए, डींगै रै टेकै॥

मालौ गाशी चाला हाए तेरो शौऊरा, ज़ाला हाथो दे बीड़े। देख तू लाड़िए
मेमौ देखिओ फौशड़े टाँगो, चूटे माऊॅं रे चीड़े॥

ऐबै देखौ तुए लाड़े रे बौइणौ, कालै माशो रे जाए।
चटक मटक हाण्डो ले जीणै, सेंट बीडज़ को आए रे॥

इणे गाई माहरे लाड़े रे बूआ, औसौ कान्ज़रे काणे।
नाज़ुक फिरौ ऐ आपूखी जाणता, सूनै तोलिओ चाणे॥

लाड़े आसो महारे सौबी कौ बाण्ठणे, लाड़ा ओर भी चाणी।
लाड़ी दे रौणी हेरे लाडेय़ा, तॉंऔ देई लाड़ी री नानी॥

ऐज़ा थिया बोलो हाए तेरा शाओरा, देखा इणा तुए केबी। देख तू लाड़िए
देखी भालियो रिश्ता लाई, शादे कौरणे ज़ेबी ॥

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