मेरी झूरीए

शेखर मास्टा एवं सुरेन्द्र कुमार ढलेटा
१६ नवम्बर, २००१

साथ नांई छोड़ना दिल नांई चोड़ना
मेरी झूरीए मेरी झूरीए।
चांऔ तेरी खातिरौ पौड़ौ जुग छोड़ना
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।

बेगी तरसाऔ मूँ हाए तेरा रूशणा
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।
ऐबै नांई गौंपीदा मेरै आशू टूशणा
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।

चोऊ धैड़ेरे औ जिन्दड़े कैंई मूँ टालना
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।
खाए हेड़े कौसमौ तॉंई सौंगै चालणा
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।

ताँ भी ज़ाणी देखीओ लागौ ज़िऊटू दा तीरौ
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।
तेरै ज़ाणी नौखरै मेरा कालज़ा नै च़ीरौ
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।

तेरी मेरी आखटी मिलणे खी तौरशौ
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।
तेरी बोलौ यादौ दी दिन राती बौरसौ
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।

Leave a Reply