सर्दियों ओर लोहड़ी की कुछ बातें

नितिन ने बचपन की याद दिला दी है, सर्दियों की छुट्टियों की बात करके।

वो लिखते हैं: “सर्दियाँ आख़िर आ ही गयीं। इस समय रात का एक बजा है और कडाके की ठण्ड पड़ रही है। इस ठण्ड में आख़िर नींद कहाँ आने वाली है। सोचा क्यों न कुछ लिखा जाए। सर्दियाँ आते ही मुझे अपने गाँव कोटगढ़ की याद आती है। बचपन में स्कूल की छुट्टियां सर्दियों में ही होती थी। तो बस स्कूल ख़तम हुए नहीं के हम सभी बच्चे कोटगढ़ का रुख कर लेते थे।…”

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