पश्चाताप का एक आँसू न बहा
माफ़ करो – न एक बार कहा।।
अहम् में तुम अब भी जीं रहे
झूठ के चीथड़े सत्य में सी रहे।।
करती हो क्या अब भी मुझे याद
या स्मरण केवल उसका छल नाद।।
क्यों मैं सिसकियों में आह भरा
जब याद न हमारा प्रणय ज़रा।।
हमारे विश्वास पर चली कैसी कैंची
प्रणय प्रसंग तुमने तार-तार बेची।।
– २७ अगस्त, २००७ (१०२९ घंटे)