Archive for नवंबर, 2007



दूसरी वर्षगाँठ

Published on नवंबर 12, 2007

मैं भूल गया था कि आज हमारी विवाह की दूसरी वर्षगाँठ है। जीजू का फोन आया बधाई देने के लिए। कुछ लोग जले पर नमक छिड़कने से बाज़ नहीं आएँगे।
कैसी विडम्बना है कि हम एक दूसरे को बधाई नहीं दे सकते। कितने दूर हो गए हैं हम?


I'll stick to my dharma and do my karma

Published on नवंबर 6, 2007

I’d been feeling low all this while. It was not about being sentimental. It was also about dharma and karma, I have talked about in one of my earlier posts.
I’ve taken a decision, and am probably at peace with myself after that. It depends how one takes it. Though it’s not vindictive as some might [...]


अलविदा

Published on नवंबर 2, 2007

तुमने दलदल चुना। अब वहीं रहो। तुम्हे एक मौका दिया गया था पश्चाताप करने का, जो कि तुमने गँवा दिया है। अब ज़िदगी भर इस बोझ को अपने सीने पर ढ़ोते रहो। और इस दलदल में रहो। अलविदा।


चलें अब तो साथ साथ

Published on नवंबर 1, 2007

चले थे जहाँ से, पर्वत छूना था।
डगर एक थी मगर क्यों फिर भटक गए?
क्यों हमसफर बदल गए, जो हम तुम