दूसरी वर्षगाँठ
मैं भूल गया था कि आज हमारी विवाह की दूसरी वर्षगाँठ है। जीजू का फोन आया बधाई देने के लिए। कुछ लोग जले पर नमक छिड़कने से बाज़ नहीं आएँगे।
कैसी विडम्बना है कि हम एक दूसरे को बधाई नहीं दे सकते। कितने दूर हो गए हैं हम?
मैं भूल गया था कि आज हमारी विवाह की दूसरी वर्षगाँठ है। जीजू का फोन आया बधाई देने के लिए। कुछ लोग जले पर नमक छिड़कने से बाज़ नहीं आएँगे।
कैसी विडम्बना है कि हम एक दूसरे को बधाई नहीं दे सकते। कितने दूर हो गए हैं हम?
I’d been feeling low all this while. It was not about being sentimental. It was also about dharma and karma, I have talked about in one of my earlier posts.
I’ve taken a decision, and am probably at peace with myself after that. It depends how one takes it. Though it’s not vindictive as some might [...]
तुमने दलदल चुना। अब वहीं रहो। तुम्हे एक मौका दिया गया था पश्चाताप करने का, जो कि तुमने गँवा दिया है। अब ज़िदगी भर इस बोझ को अपने सीने पर ढ़ोते रहो। और इस दलदल में रहो। अलविदा।
चले थे जहाँ से, पर्वत छूना था।
डगर एक थी मगर क्यों फिर भटक गए?
क्यों हमसफर बदल गए, जो हम तुम