देख तू लाड़िए
शेखर मास्टा व ढलेटा सुरेन्द्र कुमार
– १९९९
शादिए आशै आमै हेरे भाइयौ, देखो लाड़े री ज़ानी रे। देख तू लाड़िए
लाड़ी ताखू भी छोड़िओ, देख लाड़े खी ढौबो हाए तेरे नानी री॥ देख तू लाड़िए
घोड़ी गाशी आशो लॅंगड़ो लाड़ो, देख कौर दो शादीए, मेरीए दादिए।
जिशी बियाली खौरै दपारै खोलो दारू रै आदिए॥