अर्चना
Published on जुलाई 1, 2008
–१७ नवम्बर २००१ बेचैन कर रही तेरी याद दिल को चीर कर एक आवाज़। पुनः पुनः पुकार रही अर्चना। अर्चना। अर्चना।
–१७ नवम्बर २००१ बेचैन कर रही तेरी याद दिल को चीर कर एक आवाज़। पुनः पुनः पुकार रही अर्चना। अर्चना। अर्चना।
मैं भागा-भागा पपीहर पाछे सुनने कहुक मधुर पुकार। वो बैठा – बस बाँह तेरे चूड़ियों में छुप छनकार॥
–२७ मार्च २००३ न जाने कौन किस आह पर हाथ थाम बैठे बस इसी आस में कराह रहे हैं।