Archive for the 'जगजीत सिंह' Category



अकेलेपन से खौफ आता है मुझको

Published on जुलाई 15, 2008

क्यों ये जीवन इतना उदासीन लगता है? सब नीरस। आज कार्यालय नहीं गया। न जाने जीवन आज क्या दिखाना चाहता है? पिछले वर्ष एक दिवस कार्यालय नहीं गया था तो जीवन कुछ क्षणों में उथल पुथल हो गया था। सम्बन्धों के मायने ही बदल गए। आज भी किसी अनहोनी का एहसास लिए बैठा हूँ। इसी [...]


क्यों डरें?

Published on सितम्बर 28, 2007

क्यों डरें जिन्दगी में क्या होगा,
कुछ न होगा तो तज्रुरबा होगा।
हंसती आँखों में झाँक कर देखो,
कोई आँसू कहीं छुपा होगा।