मेरी झूरीए
शेखर मास्टा एवं सुरेन्द्र कुमार ढलेटा
१६ नवम्बर, २००१
साथ नांई छोड़ना दिल नांई चोड़ना
मेरी झूरीए मेरी झूरीए।
चांऔ तेरी खातिरौ पौड़ौ जुग छोड़ना
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।
शेखर मास्टा एवं सुरेन्द्र कुमार ढलेटा
१६ नवम्बर, २००१
साथ नांई छोड़ना दिल नांई चोड़ना
मेरी झूरीए मेरी झूरीए।
चांऔ तेरी खातिरौ पौड़ौ जुग छोड़ना
मेरी झूरीए मेरी झूरीए ।
शेखर मास्टा व सुरेन्द्र कुमार ढलेटा
– २५ मार्च १९९९
लाए तू मेरे हाथो दे मैंहदे भाभिए, मेरी दाई रे ऋ हाए रे
मेरी दाई रे शादे रे भाभिए, मेरी दाई रे।
इणे मिलौले ना बाण्ठणे भाभिए, जिणे औसौ हाए
जिणे औसौ मेरे दादे रे भाभिए, जिणे औसौ हाए।
शेखर मास्टा व ढलेटा सुरेन्द्र कुमार
– १९९९
शादिए आशै आमै हेरे भाइयौ, देखो लाड़े री ज़ानी रे। देख तू लाड़िए
लाड़ी ताखू भी छोड़िओ, देख लाड़े खी ढौबो हाए तेरे नानी री॥ देख तू लाड़िए
घोड़ी गाशी आशो लॅंगड़ो लाड़ो, देख कौर दो शादीए, मेरीए दादिए।
जिशी बियाली खौरै दपारै खोलो दारू रै आदिए॥
(Translated and adapted from a Pahari (Himachali) folk song)
On a warm sunny day
I hate work in the bow’ry
And say, O father mine
Do give away my dowry.